सेहत के लिए अंधेरा जरूरी, कृत्रिम रोशनी बढ़ा रही प्रदूषण !
सेहत के लिए अंधेरा जरूरी, कृत्रिम रोशनी बढ़ा रही प्रदूषण !
र्मनी में ये काम बहुत गंभीरता से हो रहा है. यूरोप और अमेरिका में ये मानने वाले बढ़ रहे हैं कि कृत्रिम प्रकाश एक तरह का प्रदूषण पैदा करता है जो जैवविविधता के लिए खतरनाक है और जलवायु के लिए भी उचित नहीं है. फिर बिजली की कम खपत करके बिजली और पैसा दोनों की बचत होती है. ज
सिंगापुर की रातें चमकदार
टोक्यों और सिंगापुर में तो रातें इतनी चमकदार और रोशनीभरी होती है कि लोग वास्तविक अंधेरे को महसूस करना चाहते हुए भी नहीं कर पाते. यूरोप और अमेरिका में भी यही स्थिति है. डैश वेले की एक रिपोर्ट के अनुसार पर्यावरण की बेहतरी के लिए रात में अंधेरा रहना फायदेमंद तो है ही साथ ही अगर हम रात में पर्याप्त अंधेरे में रहते या सोते हैं तो ये मानव स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा होता है.
अंधेरे में लीजिए भरपूर नींद नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड वेलफेयर फिनलैंड के
रिसर्च प्रोफेसर टिमो पार्टोनन ने अपनी रिसर्च में लिखा, लोग अमूमन 06 से 09 घंटे सोते हैं और अगर आप चाहते हैं कि बेहतर नींद लें तो आपको अंधेरे में सोने की जरूरत है. अच्छी नींद रक्तचाप बेहतर रखने के साथ वजन आदि बढ़ने की समस्याओं पर काबू रखती है. ब्रेन अच्छी तरह काम करता है और याददाश्त बेहतर बनी रहती है. एक अध्ययन से पता चला है कि सोते समय लाइट ऑन रखना डायबिटीज का खतरा बढ़ा सकता है.
आजकल जर्मनी में लोग शहरों की प्रमुख इमारतों, स्मारकों और सारी प्रमुख जगहों की बिजली रात को बुझा दे रहे हैं. इसी तरह वहां घरों की बत्तियां भी जल्दी बंद हो रही हैं. इसकी कई वजहें हैं, सबसे बड़ी वजह अगर ऊर्जा संकट है तो कई नए रिसर्च ये बता रहे हैं कि अंधेरा हमारी सेहत के लिए नेचुरल तौर पर फायदेमंद है.
पौधों को भी अंधेरा पसंद
अंधेरे में खास हार्मोन होता है पैदा
जिस तरह नेचुरल लाइट में नहीं रहने से विटामिन डी की कमी होने लगी है, उसी तरह अंधेरे में नहीं रहने पर एक हार्मोन की कमी हो जाती है. अंधेरे की कमी से होने वाली बीमारियों के पीछे मिलेटोनिन नाम का हॉर्मोन है जो कि अंधेरा होने पर ही निकलता है. वैज्ञानिक क्रिस्टोफर क्याबा कहते हैं, “जब हमें यह हॉर्मोन नहीं मिलता या फिर जो लोग शिफ्ट में काम करने वाले होते हैं, तब बॉयोलॉजिकल क्लॉक सिस्टम बिगड़ जाता है और उसकी वजह से समस्याएं खड़ी होने लगती हैं."
रात में कृत्रिम प्रकाश में रहने के लिए दूसरे जीवों को भी संघर्ष करना पड़ता है. उदाहरण के लिए, मूंगे प्रजनन नहीं कर पाते, प्रवासी पक्षी अपने घूमने की प्रवृत्ति को खो सकते हैं और तुरंत निकले घड़ियाल कई बार समुद्र में जाने की बजाय जमीन पर टहलने लगते हैं जिससे उनकी मौत भी हो जाती है. चमगादड़, अंधेरे में विचरण करने वाले कई पक्षी और कीड़े भी कृत्रिम प्रकाश से परेशान रहते हैं. जर्मनी में गर्मी के मौसम में कृत्रिम प्रकाश की वजह से हर साल रात में उड़ने वाले करीब 100 अरब कीड़ों की मौत हो जाती है.
किस तरह पड़ता है असर
रिसर्च ये भी बताते हैं कि स्ट्रीट लाइटों के आस-पास उगने वाले पौधों में रात के वक्त कम परागण होता है. इस वजह से उनमें फल-फूल भी कम होते हैं, जबकि यही पौधे अंधेरे की वजह से ज्यादा फल देते हैं. यहां तक बड़े-बड़े वृक्षों पर भी रात में सड़कों की रोशनी का विपरीत प्रभाव पड़ता है.
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